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लोकोदय पत्रिका

लोकोदय पत्रिकाः

‘लोकोदय’ पत्रिका का उद्देश्य जनपक्षधर साहित्य का प्रसार और प्रचार है। तमाम अस्मिताओं के लिए प्रतिपादित बाजारवादी अवधारणाओं का प्रतिरोध करते हुए उनके जनवादी विकल्पों पर चर्चा के लिए पत्रिका प्रयासरत है। जनपक्षधरता तथा लोक से जुड़े साहित्यकारों की रचनाओं को सीधे पाठकों तक पहुँचाने के लिए पत्रिका कटिबद्ध है। विधागत विभेदों का विरोध करते हुए ‘लोकोदय’ में हर विधा की मौलिक रचना व समीक्षा प्रकाशित की जाती है। पत्रिका में साहित्य के हर उस प्रसंग की परिचर्चा की जाती है जिसको बुर्जुवा और बाजारवादी समीक्षकों ने अप्रासांगिक कहकर मूल्यहीन कर दिया है। पत्रिका के लिए रचनाएँ इस ई-मेल पर प्रेषित की जा सकती हैं:

lokodaymagazine@gmail.com


लोकविमर्श

लोक विमर्श:

लोक विमर्श एक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आन्दोलन है जिसका मुख्य लक्ष्य राजधानी व सत्ता केन्द्रित बुर्जुवा साहित्य के प्रतिपक्ष में हिन्दी की मूल परम्परा लोकधर्मी साहित्य तथा गाँव और नगरों में लिखे जा रहे मठों और पीठों द्वारा उपेक्षित पक्षधर लेखन को बढावा देना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आलोचना केन्द्रित पत्रिका ‘लोक विमर्श’ प्रारम्भ की गई है.

ई-पत्रिका


शब्द व्यंजना

शब्द व्यंजना:

साहित्य पर बाजारवाद के प्रभाव के कारण आज लेखन में भाषा की मौलिकता का सवाल सबसे अहम हो गया है। भाषा की मौलिकता संरचना का सवाल नहीं है वह अनुभूति की मौलिकता का सवाल है। अनुभूत यथार्थ स्वतः मौलिक भाषा का स्रोत होता है लेकिन इन राजधानी केन्द्रित पद और सत्ता के इर्द-गिर्द भ्रमण करने वाले मीडियाकर लेखकों ने भाषा को पेशेवर अन्दाज में तब्दील करने का कुचक्र रचा है। लोकोदय प्रकाशन की मासिक ई-पत्रिका ‘शब्द व्यंजना’ इस प्रक्रिया का विरोध तथा भाषा और संरचना के सन्दर्भ में लोक भाषा और काव्य मूल्यों के प्रगतिशील पक्ष का समर्थन करती है। यह पत्रिका लोक से जुड़े प्रतिबद्ध साहित्य को पाठकों तक पहुँचाने के लिए कटिबद्ध है। पत्रिका में प्रकाशन हेतु रचनाएँ वर्ड फाइल में यूनिकोड अथवा कृतिदेव फॉण्ट में परिचय और फोटो के साथ निम्नलिखित ई-मेल पर भेजी जा सकती हैं: shabdvyanjana@gmail.com