|| लोकोदय प्रकाशन अापका स्वागत करता है ||अधिक जानकारी के लिए कृपया सम्पर्क करें ः- lokodayprakashan@gmail.com||



घोषणाएँ
 

कविता आज

लोकधर्मी साहित्यिक परम्परा से समकाल को जोड़ना आज के समय की जरूरत है इसलिए लोकोदय प्रकाशन द्वारा 'लोकोदय साहित्य श्रृंखला' प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया है। इसके अन्तर्गत लोकधर्मी कविता, गीत-नवगीत, कहानी, लोक कला इत्यादि पर आधारित संकलन प्रकाशित किए जाएँगे। इस श्रृंखला का प्रारम्भ कविताओं के साझा संकलन के रूप में किया जा रहा है।
लोकधर्मी कविताओं के साझा संकलनों की इस श्रृंखला का नाम 'कविता आज' होगा। इसके हर खण्ड में महत्वपूर्ण लोकधर्मी कवियों की पाँच-पाँच कविताएँ, उनके परिचय तथा आलोचकीय टीप के साथ सम्मिलित होंगी।
'कविता आज-1' में सम्मिलित होने के इच्छुक कवि अपनी 20 रचनाएँ, परिचय व फोटो के साथ दिनांक 30-04-2017 तक प्रकाशन की ई-मेल पर भेजना सुनिश्चित करें- lokodayprakashan@gmail.com ।

त्रिलोचन अंक

लोकोदय पत्रिका का आगामी अंक त्रिलोचन पर केंद्रित होगा। इस अंक हेतु अपने आलेख, संस्मरण, समीक्षा आदि पत्रिका के ई मेल lokodaymagazine@gmail.com पर दिनांक 10- 5- 2017 तक भेजे जा सकते हैं।
इस अंक का सम्पादन अजित प्रियदर्शी करेंगे।

लोक का विद्रोही स्वर

जहाँ तक जनपक्षधरता, लोकधर्मिता और सशक्त वैचारिकता का प्रश्न है रमाशंकर विद्रोही आज के दौर का एक महत्वपूर्ण नाम है. उनका सम्पूर्ण जीवन उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है.
लोकोदय प्रकाशन की ‘लोकोदय आलोचना श्रंखला’ के तहत रमाशंकर ‘विद्रोही’ पर केन्द्रित एक पुस्तक प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है. इस पुस्तक का नाम ‘लोक का विद्रोही स्वर’ प्रस्तावित है. इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व से सम्बंधित आलेख तथा संस्मरणों को सम्मिलित किया जाएगा.
इच्छुक रचनाकार मंगल फॉण्ट में टाइप किए हुए अपने आलेख तथा संस्मरण 15 मई तक प्रकाशन की ई-मेल पर भेज सकते हैं-
lokodayprakashan@gmail.com

लोकोदय आलोचना श्रंखला

पूँजी और सत्ता का खेल अब हिन्दी साहित्य में जोरों पर है। साहित्य जगत पर बाज़ार का प्रभाव अब स्पष्ट नज़र आता है। मठों और पीठों के संचालक, बड़े अफसर, पूँजी के बल पर साहित्य को किटी पार्टी में बदलने के इच्छुक, पैकेजिंग और मार्केटिंग में माहिर दोयम दर्ज़े के रचनाकार पूरे साहित्यिक परिदृश्य पर काबिज होने के प्रयास में लगातार लगे रहते हैं। ऐसे रचनाकारों द्वारा खुद की खातिर ‘स्पेस क्रिएट’ करने के लिए चुपचाप साहित्य कर्म में संलग्न लोकधर्मी साहित्यकारों को लगातार नज़रअंदाज़ करने, उनको हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जाती रही है।
हिन्दी में बहुत से कवि हैं जिनके लेखन पर मुकम्मल चर्चा नहीं की गयी है। ऐसे बहुत से कवि हैं जिन्होंने वैचारिक पक्षधरता को बनाए रखते हुए लोक की अवस्थितियों व संघर्षों का यथार्थ खाका खींचा तथा सत्ता और व्यवस्था के विरुद्ध प्रतिरोध की भंगिमा अख्तियार की लेकिन उनके रचनाकर्म पर समुचित चर्चा नहीं हो सकी। लोकोदय प्रकाशन ने ऐसे कवियों पर आलोचनात्मक  श्रंखला प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। इस श्रंखला का नाम होगा ‘ ‘लोकोदय आलोचना श्रंखला’। इस श्रंखला के प्रथम कवि के रूप में  वरिष्ठ कवि तथा पत्रकार सुधीर सक्सेना के व्यक्तित्व, कृतित्व व काव्य रचना प्रक्रिया पर एक संपादित पुस्तक का प्रकाशन किया जाएगा किताब का संपादन किया जाएगा। इस पुस्तक का सम्पादन प्रद्युम्न कुमार सिंह और उमाशंकर सिंह परमार करेंगे।

इस पुस्तक के लिए आलेख आमन्त्रित हैं। इच्छुक लेखक वर्ड फाइल के रूप में कृतिदेव या यूनिकोड फॉण्ट में अपने आलेख परिचय तथा नवीनतम फोटो के साथ इस ई-मेल पर ३० मई २०१६ तक भेज सकते हैं।
lokodayprakashan@gmail.com
आलेख भेजते समय यह उल्लेख अवश्य करें कि ‘आलेख सुधीर सक्सेना पर केन्द्रित पुस्तक के लिए’ भेजा जा रहा है।

लोकोदय

‘लोकोदय’ पत्रिका का जुलाई अंक ‘हिंदी साहित्य में शैक्षिक मुद्दे’ विषय पर केन्द्रित किया जा रहा है। इस अंक में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं की ऐसी रचनाओं का प्रकाशन किया जाएगा, जिनमें बालमन, स्कूल, शिक्षक, कक्षा-शिक्षक प्रक्रिया, पाठ्यचर्या, शिक्षा के उद्देश्य, वर्तमान में शिक्षा के स्वरूप, शिक्षा और शिक्षक की समस्याओं आदि को रेखांकित किया गया हो। इस अंक में शिक्षा के विविध पहलुओं से जुडी मौलिक रचनाओं जैसे- कविता, कहानी, उपन्यास अंश, निबंध, संस्मरण, आलेख, डायरी आदि के साथ-साथ उन पर आलोचनात्मक आलेखों और शिक्षा पर केन्द्रित पुस्तकों की समीक्षा का प्रकाशन भी किया जाएगा।
इस अंक के माध्यम से इस बात की गहन पड़ताल की जाएगी कि हिंदी साहित्य शैक्षिक मुद्दों को कितना और किस रूप में संबोधित करता है। इसके पीछे हमारा उद्देश्य समाज में बालमन और शिक्षा को लेकर एक सही समझ का निर्माण करना है ताकि एक रचनात्मक, संवेदनशील, लोकतान्त्रिक और वैज्ञानिक सोच से लैस समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
आपसे अनुरोध है कि इस अंक के लिए अपनी मौलिक और अप्रकाशित रचनाएँ पत्रिका के ई-मेल- lokodaymagazine@gmail.com पर भेजने के साथ-साथ उन रचनाओं से भी हमें अवगत कराने का कष्ट करें जो शिक्षा से जुडी हों। हमें आशा है कि आप अपनी रचनाएँ हमें 10 जून 2017 तक अवश्य भेजने का कष्ट करेंगे।
इस अंक का सम्पादन महेश पुनेठा करेंगे।

विधा-विविधा

प्रिय मित्रों,
लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ द्वारा सहयोग आधार पर हिंदी गद्य साहित्य का एक संकलन प्रकाशित किये जाने की योजना है जिसका विवरण निम्न प्रकार है-

  1. पुस्तक ‘विधा-विविधा’ नाम से होगी जिसमें देश के चयनित 21 साहित्यकारों द्वारा गद्य साहित्य की विभिन्न विधाओं (जैसे कहानी, लघुकथा, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, संस्मरण, लेख, निबंध, शोध आलेख, व्यंग्य, नाटक, आलोचना, विमर्श, अनुवाद, यात्रा वृतांत, एकांकी, गल्प, साक्षात्कार,पत्र लेखन आदि) में लिखी गई रचनाओं को एक बिलकुल नए कलेवर में प्रस्तुत किया जाएगा।
  2. मंगल या यूनिकोड फॉण्ट में टाइप की हुई रचनाएँ केवल ईमेल द्वारा वर्ड फाइल में ही भेजी जा सकती हैं। डाक द्वारा भेजी गई पांडुलिपि पर विचार सम्भव नहीं है। रचना के ऊपर सम्बंधित विधा अवश्य इंगित करें।
  3. रचना 2500 - 3000.
  4. रचना के साथ लेखक अपना पूरा परिचय भी भेजें जिसमें नाम, पिता व माता का नाम, वर्ष व दिनांक सहित जन्म तिथि, सम्प्रति, पूरा पता, मोबाइल नंबर व ई-मेल का उल्लेख आवश्यक है।
  5. प्रत्येक सहयोगी लेखक को सहयोग राशि के तौर पर 700/- देने होंगे।
  6. प्रकाशनोपरांत प्रत्येक लेखक को पुस्तक की 5 प्रतियाँ दी जाएँगी |
  7. पुस्तक का लोकार्पण लखनऊ में किया जाएगा।
  8. पुस्तक का प्रचार-प्रसार इंटरनेट तथा पत्रिकाओं के माध्यम से करवाया जाएगा।
  9. रचनाएँ भेजने की अंतिम तिथि 30 मार्च 2017 है।
  10. रचना की वर्ड फाइल अपने परिचय और फोटो के साथ निम्न ई-मेल पर भेजें --lokodayprakashan@gmail.com

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